
रामानुजगंज में एक ही अधिकारी को तीन विभागों का प्रभार, जनता परेशान — प्रशासनिक निर्णय पर उठे सवाल..
उक्त अधिकारी के पास जनपद सीईओ ,तहसीलदार ,और रजिस्टार जैसे महत्वपूर्ण विभाग का भी प्रभार है..
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ रामचंद्रपुर जनपद में 94 ग्राम पंचायत और तहसील के अंतर्गत लगभग 25हल्का और अनेक गांव आते हैं वही जिले का सबसे ज्यादा रजिस्ट्री भी इसी विकासखंड में होता है, उसके बाद भी एक अधिकारी को तीन-तीन विभाग देना कई सवालों को जन्म देता है..
जानकारी के अनुसार रामानुजगंज रजिस्ट्री कार्यालय में ही वाड्राफनगर का भी रेजिस्टरी और अनुबंध होता है लगभग प्रतिमा सैकड़ो रजिस्ट्री अनुबंध होते हैं और अधिकारी मिलते ही नहीं क्योंकि उनके पास अन्य दो विभागों का और प्रभार है जनपद कार्यालय और तहसील कार्यालय का भी है..
बलरामपुर जिले के सबसे बड़े और प्रमुख विकासखंड रामानुजगंज-रामचंद्रपुर में एक अधिकारी को एक साथ तीन विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मामला इन दिनों आम जनमानस में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस निर्णय से आम नागरिकों को अपने जरूरी कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उक्त अधिकारी को जनपद सीईओ, तहसीलदार और रजिस्ट्रार जैसे तीन महत्वपूर्ण पदों का प्रभार एक साथ दे दिया गया है। जहां जनपद कार्यालय के अंतर्गत लगभग 94ग्राम पंचायतें आती हैं और विभिन्न शासकीय योजनाओं का संचालन किया जाता है, वहीं तहसील कार्यालय में भी राजस्व संबंधी अनेक कार्य प्रतिदिन होते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रार कार्यालय का कार्य भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, जहां प्रतिदिन आम जनता को जमीन संबंधी दस्तावेजों के पंजीयन की आवश्यकता होती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब वे किसी एक कार्यालय में अपने कार्य हेतु पहुंचते हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि अधिकारी दूसरे कार्यालय में हैं। कभी अधिकारी जनपद में मिलते हैं, तो कभी तहसील में, और कभी रजिस्ट्रार कार्यालय में। ऐसे में जनता को बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं और जरूरी काम समय पर नहीं हो पाते।
रामानुजगंज निवासी का कहना है कि कब तक एक ही अधिकारी को तीन-तीन विभागो का प्रभार चलता रहेगा , की जब भी ऑफिस में जाते हैं, हर बार यही जवाब मिलता है कि साहब तहसील या रजिस्ट्रार के कार्य में व्यस्त हैं। एक अधिकारी पर इतनी जिम्मेदारी डालना सरासर अन्याय है, इससे जनता को ही नुकसान हो रहा है।”
प्रशासनिक जानकार भी मानते हैं कि एक ही व्यक्ति को इतने बहुमूल्य और जवाबदेही वाले विभाग सौंपना व्यावहारिक रूप से कठिन होता है, खासकर ऐसे बड़े विकासखंड में जहां जनसंख्या और कार्यभार दोनों अत्यधिक हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन इस स्थिति की गंभीरता को समझेगा और संबंधित अधिकारी से अतिरिक्त प्रभार हटाकर स्वतंत्र रूप से विभागीय पदस्थापन सुनिश्चित करेगा?
जनता को जवाब और राहत दोनों का इंतजार है।

