
संजय गुप्ता/बलरामपुर@ बलरामपुर जिले के अधौरा गांव में एक दिन पहले एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई.. आखिरकार पत्नी ने अपने ही पति के सिंदूर को मिटाने की रची साजिश रची और करंट से तड़प कर पति की कर दी बे – रहमी से हत्या क्या थी यह पूरी खौफनाक वारदात की दास्तान देखिए इस रिपोर्ट पर..
एक शांत गांव में गूंजती चीखें, एक बंद कमरा, और एक ऐसी पत्नी जिसने अपमान और गुस्से के भंवर में डूबकर ले ली अपने ही पति की जान.. बलरामपुर जिले के अधौरा गांव में एक चौंका देने वाला हत्याकांड सामने आया है, जिसमें एक पत्नी ने अपने पति को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया.. वजह थी – पति द्वारा दूसरी शादी करना और वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक कलह..
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची, मगर घर अंदर से बंद था.. दरवाज़ा खटखटाने पर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पुलिस ने जबरन दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश की.. तभी अंदर से पार्वती गुप्ता ने दरवाज़ा खोला और सामने आते ही बेहोश होकर गिर गई.. जब पुलिस ने घर के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था.. मनोज गुप्ता, उम्र लगभग 50 वर्ष, अचेत अवस्था में ज़मीन पर पड़े थे – दोनों हाथ और पैर बंधे हुए.. तत्काल को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मनोज गुप्ता को मृत घोषित कर दिया..

हत्या की रात : पति की दूसरी पत्नी से थी नाराज पार्वती, दी करंट से दर्दनाक मौत..
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हत्या की रात : पति की दूसरी पत्नी से थी नाराज पार्वती, दी करंट से दर्दनाक मौत..

संजय गुप्ता/बलरामपुर@ बलरामपुर जिले के अधौरा गांव में एक दिन पहले एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई.. आखिरकार पत्नी ने अपने ही पति के सिंदूर को मिटाने की रची साजिश रची और करंट से तड़प कर पति की कर दी बे – रहमी से हत्या क्या थी यह पूरी खौफनाक वारदात की दास्तान देखिए इस रिपोर्ट पर..
एक शांत गांव में गूंजती चीखें, एक बंद कमरा, और एक ऐसी पत्नी जिसने अपमान और गुस्से के भंवर में डूबकर ले ली अपने ही पति की जान.. बलरामपुर जिले के अधौरा गांव में एक चौंका देने वाला हत्याकांड सामने आया है, जिसमें एक पत्नी ने अपने पति को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया.. वजह थी – पति द्वारा दूसरी शादी करना और वर्षों से चले आ रहे पारिवारिक कलह..
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची, मगर घर अंदर से बंद था.. दरवाज़ा खटखटाने पर जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पुलिस ने जबरन दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश की.. तभी अंदर से पार्वती गुप्ता ने दरवाज़ा खोला और सामने आते ही बेहोश होकर गिर गई.. जब पुलिस ने घर के भीतर प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था.. मनोज गुप्ता, उम्र लगभग 50 वर्ष, अचेत अवस्था में ज़मीन पर पड़े थे – दोनों हाथ और पैर बंधे हुए.. तत्काल को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मनोज गुप्ता को मृत घोषित कर दिया..

पृष्ठभूमि: एक टूटता रिश्ता और उबलता गुस्सा..
जांच में सामने आया कि मृतक मनोज गुप्ता की दो पत्नियां थीं.. पहली पत्नी पार्वती गुप्ता के साथ वह ग्राम बरदर में रहता था, जबकि दूसरी पत्नी को उसने बलरामपुर में किराए के मकान में रखा हुआ था.. इस दूसरी शादी से पार्वती गुप्ता नाराज थी और पिछले कई वर्षों से दोनों के बीच झगड़े का सिलसिला जारी था..
इस तनावपूर्ण रिश्ते में पहले भी कई बार विवाद थाने तक पहुँच चुका था.. पार्वती ने पति के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों में शिकायत दर्ज करवाई थी.. साथ ही महिला आयोग में भी मामला दर्ज हुआ था।
हत्या की रात का घटनाक्रम..
29 और 30 जुलाई की दरम्यानी रात को दोनों के बीच फिर से कहासुनी शुरू हुई.. गुस्से में पार्वती ने मनोज से कहा, “अब मैं तुम्हें किसी और के पास नहीं जाने दूंगी, तुम्हें अपने पास बांधकर रखूंगी। ” इस पर मनोज गुप्ता ने चुनौतीपूर्ण लहजे में कहा – “ठीक है, बांध लो।”
कहते हैं, कभी-कभी शब्द भी मौत का कारण बन जाते हैं। पार्वती ने पति के हाथ-पैर बांध दिए.. लेकिन ये सिर्फ गुस्से की शुरुआत थी.. पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि विवाद के बाद पार्वती ने घर में रखे एक्सटेंशन वायर से अपने पति को इलेक्ट्रिक करंट देना शुरू किया.. एक के बाद एक झटके, और मनोज गुप्ता की मौके पर ही मृत्यु हो गई..
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी..
थाना बलरामपुर ने इस मामले में मर्ग क्रमांक 46/2025 धारा 194 बीएनएसएस और अपराध क्रमांक 105/2025 धारा 103 (1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया.. गहन जांच और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पार्वती गुप्ता को दिनांक 31 जुलाई 2025 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया.. अदालत ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है..
विश्लेषण : एक सामाजिक सन्दर्भ..
यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, यह उस सामाजिक तानेबाने की भी झलक है जिसमें रिश्तों की डोर, अविश्वास और आक्रोश में टूट जाती है.. दूसरी शादी का कदम, पारिवारिक संवाद की कमी, और वर्षों से चल रहा दांपत्य कलह – ये सभी कारक इस हत्या की ज़मीन तैयार करते हैं..
निष्कर्ष..
बलरामपुर की यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है – क्या रिश्तों में संवाद की कमी इस हद तक घातक हो सकती है? क्या एक महिला को इतना टूटा हुआ और अकेला महसूस करवाया जा सकता है कि वह हत्या जैसा कदम उठाए ? और सबसे महत्वपूर्ण – क्या हमारा समाज ऐसे मामलों से सबक लेगा ?



